Buddhist Leader Pushes for Nuke Abolition Treaty_Hindi

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बौद्ध नेता ने परमाणु उन्‍मूलन संधि का समर्थन किया

आईडीएन-इनडेप्‍थ न्‍यूज़ दाइसाकु इकेदा का साक्षात्‍कार


बर्लिन/टोक्‍यो (आईडीएन) - प्रख्‍यात बौद्ध चिंतक, दाइसाकु इकेदा ने परमाणु हथियारों और जनसंहार के अन्‍य सभी हथियारों का उन्‍मूलन करने के लिए वैश्विक संधि के वास्‍ते जल्‍द वार्ताएं शुरू करने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि आदर्श स्थिति तो यह होगी कि  हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर ऐसा हो।

 

 

परमाणु हथियार संधि (एनडब्‍ल्‍यूसी) के रूप में अंतर्राष्‍ट्रीय संधि परमाणु हथियारों के विकास, परीक्षण, उत्‍पादन, ज़खीरेबाज़ी, हस्‍तांतरण, प्रयोग और प्रयोग की धमकी पर रोक लगाने के साथ ही उनके उन्‍मूलन का भी प्रावधान करेगी। इसका स्‍वरूप अन्‍य श्रेणियों के हथियारों, जैसे जैव हथियारों, रासायनिक हथियारों और व्‍यक्तियों को उड़ाने वाली बारूदी सुरंगों को ग़ैरक़ानूनी घोषित करने वाली मौजूदा संधियों जैसा ही होगा।


परमाणु हथियार संधि के प्रस्‍तावों पर 1996 से ही चर्चाएं जारी हैं। अब पहली बार न्‍यूयार्क स्थित संयुक्‍त राष्‍ट्र मुख्‍यालय में 3 से 28 मई तक हुई परमाणु हथियार अप्रसार संधि के पक्षकारों के समीक्षा सम्‍मेलन में जारी अंतिम दस्‍तावेज़ में एनडब्‍ल्‍यूसी का उल्‍लेख किया गया है।

 

वर्षों से परमाणु शस्‍त्रागार को समाप्‍त करने के लिए अभियान चला रहे बौद्ध संघ सोका गक्‍काई इंटरनेशनल (एसजीआई) के अध्‍यक्ष इकेदा ने कहा, ''हमें इस संवेग को और आगे बढ़ाना होगा।'' उन्‍होंने परमाणु उन्‍मूलन के उद्देश्‍य से सितंबर 2009 के शुरू में पांच सूत्रीय योजना तैयार की।

 

रमेश जौरा द्वारा इंटर प्रेस सर्विस न्‍यूज़ एजेंसी के साथ साझेदारी में आईडीएन-इनडेप्‍थन्‍यूज़ के लिए एसजीआई के अध्‍यक्ष के र्इमेल साक्षात्‍कार का संक्षिप्‍त संस्‍करण नीचे दिया गया है:

 

प्र: डा. इकेदा, एनपीटी समीक्षा सम्‍मेलन के परिणाम के बारे में आप क्‍या सोचते हैं? क्‍या यह वाकई परमाणु उन्‍मूलन की दिशा में विश्‍व के बढ़ने का मार्ग प्रशस्‍त करता है? या यह केवल बहुत-से वादे और घिसी-पिटी बातें हैं, जैसा कि कुछ प्रेक्षकों का मानना है?

 

उ: जैसाकि आप कहते हैं, लोग अब समीक्षा सम्‍मेलन के परिणाम का आकलन करने का प्रयास कर रहे हैं, और इस विषय पर अनेक प्रकार के विचार मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, यह दुखद था कि परमाणु-हथियार संपन्‍न और गैर-परमाणु-हथियार देशों के बीच के मुख्‍य मतभेदों को सुलझाया नहीं जा सका। इसके परिणामस्‍वरूप, मसौदा रिपोर्ट का वह प्रस्‍ताव अंतिम दस्‍तावेज़ में जगह नहीं बना सका जिसके तहत परमाणु निरस्‍त्रीकरण पर समयबद्ध ढंग से वार्ताओं की शुरुआत करना ज़रूरी होता। इसके अलावा, कई अन्‍य मुद्दे अनसुलझे छोड़ दिए गए।

 

फिर भी, उस किस्‍म के बंटवारों से बचा गया जिनके कारण 2005 का एनपीटी समीक्षा सम्‍मेलन ठप हो गया था, और अंतिम दस्‍तावेज़ में विशिष्‍ट कार्य योजनाएं शामिल हैं। मेरी नज़र में यह सरकारों में इस बात की बढ़ती जागरूकता का स्‍पष्‍ट प्रमाण है कि हम परमाणु हथियारों से मुक्‍त विश्‍व की दिशा में अवसर को बर्बाद नहीं कर सकते।

 

प्र: आप उल्‍लेखनीय अपलब्धियां किसे कहेंगे?

 

उ: मैं समझता हूं कि सम्‍मेलन की तीन विशेष रूप से उल्‍लेखनीय उपलब्धियां रहीं। पहली, यह कहने के बाद कि सभी देशों को परमाणु हथियारों के बिना विश्‍व हासिल करने और उसे ऐसा ही बनाए रखने के लिए आवश्‍यक फ्रेमवर्क स्‍थापि‍त करना होगा, अंतिम दस्‍तावेज़, आज तक पहली बार, परमाणु हथियार संधि (एनडब्‍ल्‍यूसी) के लिए प्रस्‍तावों की चर्चा करता है।

 

दूसरे, सम्‍मेलन स्‍वीकार करता है कि परमाणु हथियारों से उपस्थित ख़तरे के विरुद्ध एकमात्र वास्‍तविक आश्‍वासन उनका उन्‍मूलन करना ही है। और तीसरे, सम्‍मेलन ने परमाणु हथियारों के किसी प्रयोग के विनाशकारी प्रभावों की रोशनी में देशों से अंतर्राष्‍ट्रीय मानवतावादी कानून का पालन करने का आह्वान किया।

 

गैर-परमाणु-हथियार देशों और गैर-सरकारी संस्‍थाओं द्वारा जन संहार के इन हथियारों पर संपूर्ण प्रतिबंध लगाने वाली परमाणु हथियार संधि की अपीलें अब तक इस आधार पर खारिजकी जाती रही हैं कि अभी इसका समय नहीं आया है, या एनडब्‍ल्‍यूसी अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों की वास्‍तविकता से मेल नहीं खाती है।

 

इसके परिणामस्‍वरूप, अंतर्राष्‍ट्रीय वार्ताओं में इसे सीधे तौर पर कभी शामिल नहीं किया गया, और इसीलिए एनपीटी समीक्षा सम्‍मेलन के अंतिम दस्‍तावेज़ में एनडब्‍ल्‍यूसी का उल्‍लेख और भी महत्‍वपूर्ण हो जाता है।

 

मैं मानता हूं कि समीक्षा सम्‍मेलन के अध्‍यक्ष, संयुक्‍त राष्‍ट्र की संबंधित एजेंसियों जैसे निरस्‍त्रीकरण मामलों के कार्यालय, और परमाणु उन्‍मूलन के लिए वचनबद्ध सरकारों समेत अनेक संस्‍थाओं के एक साथ आने और साथ ही नागरिक समाज के अनेक संगठनों के जोशीले तथा दृढ़निश्‍चयी प्रयासों के कारण संभव हो सका। उदाहरण के लिए, जापान में सोका गक्‍काई के युवा सदस्‍यों ने एनडब्‍ल्‍यूसी के पक्ष में 22 लाख से अधिक हस्‍ताक्षर एकत्र किए, जिन्‍हें सम्‍मेलन के अध्‍यक्ष और संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव को सौंपा गया। [. . .]

 

प्र: विज्ञान एवं वैश्विक मामलों पर पगवाश सम्‍मेलनों के अध्‍यक्ष, डा. जयंत धनपाल ने मध्‍य पूर्व पर 1995 के प्रस्‍ताव को क्रियान्वित करने पर सम्‍मेलन की सहमति को सम्‍मेलन की ''सबसे महत्‍वपूर्ण उपलब्धि'' बताया है। लेकिन विशेषज्ञों को संदेह है कि यह सहमति परमाणु हथियार मुक्‍त मध्‍य पूर्व क्षेत्र की दिशा में ले जा सकेगी। क्‍या कुछ बेहद महत्‍वपूर्ण बिंदुओं पर अमेरिका और इज़रायल की आपत्तियों की रोशनी में यह संदेह उचित नहीं है?

 

उ: पिछले वर्ष लागू होने वाली जिन संधियों ने मध्‍य एशिया और अफ्रीका में परमाणु हथियार मुक्‍त क्षेत्र (एनडब्‍ल्‍यूएफज़ेड) स्‍थापित किए वे आशा का महत्‍वपूर्ण स्रोत हैं। ये क्षेत्र एनडब्‍ल्यूएफज़ेड स्‍थापित करने में लातिन अमेरिका, दक्षिण प्रशांत और दक्षिणपूर्व एशिया के साथ शामिल हो गए हैं। यह खास तौर पर इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दो नए एनडब्‍ल्‍यूएफज़ेड में ऐसे देश शामिल हैं जिन्‍होंने अतीत में परमाणु हथियार या तो विकसित किए हैं या उनके पास रहे हैं।

 

अगली चुनौती दुनिया के अन्‍य क्षेत्रों में परमाणु हथियारों की समाप्ति को बढ़ावा देना है। उत्तरपूर्व एशिया और दक्षिण एशिया की ही तरह, मध्‍य पूर्व में इस लक्ष्‍य का रास्‍ता कठिन चुनौतियों से भरा हुआ है।

 

इसी पृष्‍ठभूमि में एनपीटी समीक्षा सम्‍मेलन ने परमाणु हथियारों और जन संहार के अन्‍य सभी हथियारों से मुक्‍त मध्‍य पूर्व क्षेत्र स्‍थापित करने के लिए 2012 में सम्‍मेलन बुलाया है। कहने की ज़रूरत नहीं कि मध्‍य पूर्व में मौजूद मुद्दे जटिल हैं और कोई एक सम्‍मेलन बुलाकर उन्‍हें हल नहीं किया जा सकता। सच तो यह है कि उस क्षेत्र में संघर्ष और हिंसा तथा गहरे-पैठी शत्रुताओं के इतिहास को देखते हुए, सम्‍मेलन बुलाना भी कतई आसान नहीं होगा।

 

लेकिन वर्तमान स्थिति स्‍पष्‍टतया असहनीय है और किसी भी समय और बिगड़ सकती है। इन कारणों से, संवाद के रास्‍ते विकसित करने और तनाव कम करने के उपाय तलाशने की ज़रूरत है। [. . .] (आईडीएन-इनडेप्‍थन्‍यूज़/21.06.2010)

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http://www.indepthnews.net/area2.php?key=ARMS

http://www.nuclearabolition.net

 

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