Aiming at Global Disarmament by 2030 - HINDI

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2030 तक वैश्विक निरस्त्रीकरण का लक्ष्य

रमेश जौरा द्वारा

IDN-InDepth NewsAnalysis (गहन समाचार विश्लेषण)

बर्लिन (IDN) - प्रख्यात बौद्ध नेता दाइसेकू इकेदा परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के आन्दोलन को बल प्रदान करने के लिए 2015 में एक "विस्तारित परमाणु शिखर सम्मेलन" का आह्वान कर रहे हैं जो वर्ष 2030 में वैश्विक निरस्त्रीकरण के लक्ष्य हेतु एक बड़े प्रयास के लिए शुरुआती बिंदु के रूप में काम कर सके।

इसे ध्यान में रखते हुए, उन्हें उम्मीद है कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) और दूरंदेशी सरकारें एक कार्य समूह की स्थापना करेंगी जो इस वर्ष की समाप्ति से पहले परमाणु हथियारों को गैरकानूनी घोषित करने वाले परमाणु हथियार संविदा (NWC) का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया आरंभ करेगा। ये परमाणु हथियार केवल अमानवीय हैं बल्कि वर्ष दर वर्ष 105 अरब डॉलर भी डकार जाते हैं।

टोक्यो आधारित एक सामान्य एवं वैश्विक बौद्ध संगठन सोका गक्काई इंटरनेशनल (SGI) के प्रमुख इकेदा लिखते हैं, "एक बहुत बड़ा कारक होगा ... उन देशों द्वारा अपनाया गया रवैया जो परमाणु हथियार संपन्न राज्यों की तथाकथित परमाणु छतरी के विस्तारित शक्ति संतुलन (डिटरेंस) पर भरोसा करते आए हैं"

SGI के अध्यक्ष परम संतुष्टि के साथ यह कहते हैं कि अब तक इस वक्तव्य (जिसमें प्रसार पर लगाम लगाने पर जोर दिया गया है और सामूहिक विनाश वाले परमाणु हथियारों के उन्मूलन का आवाहन किया गया है) पर हस्ताक्षर करने वालों में " केवल परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों (NWFZs) में शामिल देश और तटस्थ देश शामिल हैं, बल्कि नॉर्वे और डेनमार्क जैसे देश भी हैं जो नाटो के सदस्य हैं और इस तरह उस संगठन की परमाणु छतरी के तहत आते हैं। लेकिन फिर भी इन दोनों देशों ने सिर्फ इस वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं, बल्कि उसका मसौदा तैयार करने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"

वे आगे कहते हैं कि दूसरी ओर, जापान, जो अमेरिकी परमाणु छतरी पर ही निर्भर है, कुछ महत्वपूर्ण वक्तव्यों पर हस्ताक्षर करने से परहेज कर रहा है, और वे टोक्यो से विनती कर रहे हैं कि "वह भी जल्द से जल्द परमाणु हथियारों को अमानवीय मानते हुए उन्हें निषेध करने की मांग करने वाले अन्य देशों के साथ मिलकर इन हथियारों के खतरे से मुक्त दुनिया को साकार करने की दिशा में कार्य करे"

अपने 2013 के शांति प्रस्ताव 'करुणा, बुद्धि और साहस: एक शांतिपूर्ण और रचनात्मक वैश्विक समाज का निर्माण' में इकेदा "वर्ष 2030 तक एक शांतिपूर्ण और रचनात्मक सह-अस्तित्व वाले वैश्विक समाज के निर्माण की संभावनाओं" को तलाशने का प्रयास करते हैं।

मूलतः सोका गक्की के द्वितीय अध्यक्ष जोसेई टोडा की 1957 की परमाणु हथियार विरोधी घोषणा से प्रेरित, इकेदा प्रति वर्ष एक शांति प्रस्ताव प्रकाशित करते हैं जो मूल बौद्ध अवधारणाओं और वैश्विक समाज द्वारा शांति और मानव सुरक्षा के प्रयासों के समक्ष उत्पन्न होने वाली विविध चुनौतियों के आपसी संबंध पर सूक्ष्म निगाह डालता है। उन्होंने शिक्षा में सुधार, पर्यावरण, संयुक्त राष्ट्र और परमाणु उन्मूलन जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार प्रकट किए हैं।

2013 का शांति प्रस्ताव इस वर्ष घटित होने वाली दो महत्वपूर्ण घटनाओं के दौर में आया है: 4-5 मार्च को ओस्लो में नार्वे के विदेश मंत्रालय द्वारा परमाणु हथियारों के मानवीय परिणामों पर आयोजित किया जाने वाला सम्मेलन - जिसके ठीक पहले परमाणु हथियारों पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने के संबंध में एक नागरिक समाज मंच द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया जाना है; और सितंबर में परमाणु निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक उच्च स्तरीय बैठक।

इकेदा के 2013 के शांति प्रस्ताव में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों पर किए जाने वाले कुल वार्षिक व्यय की विशाल मात्रा "महज इन हथियारों को निरंतर बनाए रखने के द्वारा समाज पर थोपे जाने वाले भारी बोझ" को रेखांकित करता है। यह आगे कहता है: "यदि इन वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और शिक्षा कार्यक्रमों अथवा अन्य देशों के लिए विकास सहायता हेतु किया जाए तो लोगों के जीवन और उनकी गरिमा पर अतुलनीय सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"

SGI अध्यक्ष ने तीन ठोस प्रस्ताव पेश किए हैं:

पहला, निरस्त्रीकरण को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का एक महत्वपूर्ण विषय बनाना: विशेष रूप से, वे प्रस्तावित करते हैं कि 2010 के स्तर की तुलना में वैश्विक सैन्य व्यय को आधा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमानवीय माने गए परमाणु हथियारों और अन्य सभी हथियारों के उन्मूलन को, वर्ष 2030 तक हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों की सूची में शामिल किया जाए। 20 जून 2012 को रियो+20 सम्मेलन के अवसर पर मेरे द्वारा जारी किए गए प्रस्ताव में, इकेदा ने जोर दिया है कि हरित अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा निवारण एवं राहत से संबंधित लक्ष्यों को SDGs में शामिल किया जाना जाना चाहिए, और मेरा विश्वास है कि निरस्त्रीकरण लक्ष्यों पर भी गंभीरता पूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो (IPB), नीति अध्ययन के लिए संस्थान (IPS) और अन्य नागरिक समाज संगठन वर्तमान में सैन्य खर्च की वैश्विक कटौती की वकालत कर रहे हैं, और SGI इस जागरूकता के साथ इसका समर्थन करता है कि निरस्त्रीकरण एक लोकोपकारी गतिविधि है।

दूसरा, 2015 तक एक प्रारंभिक मसौदे पर समझौते के लक्ष्य के साथ, एक परमाणु हथियार संविदा के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना: इकेदा कहते हैं, "इस लक्ष्य के लिए हमें एक सक्रिय और बहुमुखी बहस की शुरुआत करनी होगी जो परमाणु हथियारों की अमानवीय प्रकृति पर केंद्रित हो ताकि मोटे तौर पर अंतरराष्ट्रीय जनमानस की राय तैयार की जा सके"

तीसरा, परमाणु हथियार मुक्त विश्व के लिए एक विस्तारित शिखर सम्मलेन आयोजित करना: 2015 का G8 शिखर सम्मलेन, हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु हमलों की सत्तरवीं वर्षगांठ, इसके लिए एक आदर्श अवसर है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों तथा परमाणु हथियारों से लैस गैर-G8 राज्यों के साथ-साथ पांच मौजूदा NWFZs – एंटार्कटिक संधि, लैटिन अमेरिकी NWFZ (लातेलोको संधि), दक्षिण प्रशांत NWFZ (रारोटोंगा संधि), दक्षिणपूर्व एशिया NWFZ (बैंकॉक संधि), और अफ़्रीकी NWFZ (पेलिंदाबा संधि) - के सदस्यों और उन राष्ट्र को शामिल होना चाहिए जिन्होंने परमाणु उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभाई है, SGI के अध्यक्ष व्याख्या करते हैं।

इकेदा कहते हैं, "यदि संभव हो तो जर्मनी और जापान, जो क्रमशः 2015 और 2016 के लिए G8 के मेजबान देश हैं, उन्हें इस क्रम को पलट देना चाहिए ताकि हिरोशिमा या नागासाकी में इस बैठक का आयोजन संभव हो सके"

पिछले शांति प्रस्तावों में, उन्होंने आग्रह किया है कि परमाणु उन्मूलन शिखर सम्मेलन को साकार करने के एक जरिये के रूप में 2015 एनपीटी समीक्षा सम्मेलन हिरोशिमा और नागासाकी में आयोजित किया जाए। उन्हें अभी भी उम्मीद है कि इस तरह की एक बैठक का आयोजन किया जा सकता है। [IDN-InDepthNews – फरवरी 12, 2013]

 

 

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